श्री महालक्ष्मीची आरती | shri Mahalakshmi Aarti lyrics

इस लेख में देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक मराठी आरती (भक्ति गीत) के बोल हैं। आरती देवी के विभिन्न गुणों और रूपों की प्रशंसा करती है, जैसे कि उनकी सर्वव्यापी प्रकृति, देवताओं और ऋषियों की माँ के रूप में उनकी भूमिका, उनकी सुंदरता और उनकी शक्ति। यह भगवान शिव के साथ उनके जुड़ाव और बाधाओं पर काबू पाने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में उनकी पूजा के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। आरती देवी के प्रति भक्त के समर्पण और श्रद्धा, कृतज्ञता व्यक्त करने और उनसे आशीर्वाद मांगने पर जोर देती है।

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12/11/20231 मिनट पढ़ें

श्री महालक्ष्मीची आरती

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी llधृll

करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।

पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।

कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।

सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां ll१ll

जय देवी जय देवी…॥

मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।

झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।

माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।

शशिकरवदना राजस मदनाची जननी ll२ll

जय देवी जय देवी…॥

तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।

सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।

गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।

प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी ll३ll

जय देवी जय देवी…॥

अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।

मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।

वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।

हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी ll४ll

जय देवी जय देवी…॥

चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।

लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।

पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।

मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी ll५ll